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Essay In Hindi On Diwali Wishes

2018 दीवाली त्यौहार पर निबंध Essay on Diwali Festival in Hindi

क्या आप दिवाली पर निबंध पढना चाहते हैं?
क्या आप दीपावली का इतिहास और महत्व जानना चाहते हैं?

दीवाली त्यौहार पर निबंध Essay on Diwali Festival in Hindi / Essay on Deepawali Festival 2018

2018 दीवाली पर निबंध Essay on Diwali in Hindi

दिवाली / दीपवाली हिन्दुओं का एक मुख्य त्यौहार है। लगभग पुरे भारत में दीपवाली त्यौहार को बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है। दिवाली का शुभ उत्सव प्रतिवर्ष शरद ऋतू के मौसम में आता है यानि की अक्टूबर और नवम्बर के महीने के समय। दीपावली के त्यौहार को बुराई पर अच्छाई की जित की ख़ुशी में मनाया जाता है।

दिवाली पांच दिनों तक मनाया जाने वाला बहुत ही बड़ा त्यौहार है जिसे बहुत ही रसमों रिवाज़ के साथ मनाया जाता है। दिवाली के उत्सव के से पहले दिन लोग धनतेरस मनाते हैं, उसके बाद नरक चतुर्दशी दुसरे दिन, तीसरे और चौथे दिन दीपावली का पर्व और पांचवे दिन भाई दूज का त्यौहार मनाते हैं।

दिवाली उत्सव और पूजा के एक हफ्ते पहले से ही लोग अपने घरों की पुताई करवा कर अच्छे से साफ़ सफाई करते हैं। साथ ही पूजा की सामग्री जैसे दिया, मोमबत्तियां, पूजा का सामन, घर के देवी-देवताओं की मूर्तियाँ तथा स्वादिष्ट मिठाईयों का प्रबंध करते हैं। दिवाली पूजा के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा ली जाती है। सभी लोग इस दिन भगवान से घर की सुख-शांति और जीवन में समृद्धि की कामना सकते हैं।

लोग अपने घरों को दीपक से सजा देते हैं। लोग अपने घरों के दरवाजों के सामने सबसे पहले दीप जलाते हैं भगवान को अपने घर में आमंत्रित करते हैं। पूजा के बाद ज्यादातर लोग पटाखे फोड़ते हैं और उसके बाद अपने पड़ोसियों, दोस्तों और रिश्तेदारों में तौफे और मिठाइयाँ बाँटते हैं। दिवाली के दिन सभी सरकार और गैर-सरकारी कार्यालय, स्कूलों में छुट्टी का दिन होता है।

दिवाली का उत्सव पटाखों के बिना मनाएं Diwali Celebration without Crackers

आप सभी तो जानते ही होंगे दिवाली में पटाखों का उपयोग पुरे भारत में जोर शोर से होता है। माना जाता है दिवाली के दिन पुरे भारत का प्रदुषण 50% बढ़ जाता है। आप सभी को में निवेदन करता हूँ की इस बार बिना पटाखों के मनाएं दिवाली। पटाखों के उपयोग से चंद भर के मज़े के लिए हम अपने पर्यावरण को कई हद तक बर्बाद कर देते हैं। आतिशबाजी हमारे शरीर और पर्यावरण दोनों के लिए बहुत ही हानिकारक हैं।

दिवाली में हम पटाखों के कारण हम भारतीय ना सिर्फ भारत का बल्कि पुरे विश्व का प्रदुषण बढ़ाते हैं। पटाखों के कारण ऐसे कई प्रकार के हादसे होते हैं जिनमे बच्चों से लेकर बड़े सभी इसका शिकार हो जाते हैं। पटाखों के धुंए के कारण अस्थमा, फूस-फूस में इन्फेक्शन और कई प्रकार के अन्य बड़ी बिमारियों होती है।

पटाखों के कारण सभी प्रकार का प्रदुषण होता है जैसे वायु प्रदुषण धुआं के कारण, दवानी प्रदुषण पटाखों के आवाज़ के कारण, जहरीले पदार्थ जमीन पर पड़ने के कारण मिटटी प्रदुषण और पटाखों का जहरीला पदार्थ पानी में मिल जाने के कारण जल प्रदुषण।

दिवाली का महत्व Significance of Diwali Festival in Hindi

दिवाली त्यौहार का अध्यात्मिक महत्व सबसे पहले यही है की इस दिन अंधकार पर प्रकश की विषय का दिन माना जाता है। इस दिन को बहुत ही सुन्दर और बड़े पारंपरिक तरीके से धन की देवी, लक्ष्मी और ज्ञान के भगवान, गणेश जी की पूजा की जाती है। हिन्दू महाकाव्य रामायण के अनुसार दिवाली का त्यौहार श्री राम भगवान, माता सीता और लक्ष्मण के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की ख़ुशी में खासकर मनाया जाता है।

भारत के कुछ क्षेत्रों में महाकाव्य महाभारत के अनुसार दिवाली का त्यौहार पांडवों के 12 वर्ष का वनवास और 1 वर्ष के अज्ञातवास के बाद लौटने की ख़ुशी में भी मनाया जाता है। यह भी माना जाता है कि इस दिन को देवताओं और राक्षसों द्वारा समुद्र मंथन करते समय माता लक्ष्मी का जन्म हुआ था। भारत के कुछ पूर्वी और उतारी क्षेत्रों में नव हिंदी वर्ष के रूप में भी मनाया जाता है।

आशा करते हैं आपकी दिवाली पर यह निबंध अच्छा लगा होगा। हम सभी को प्रतिवर्ष दिवाली का उत्सव पर्यावरण की प्राकृतिक सुंदरता को बचाने, स्वछता बनाये रखने और आनंद लेने के लिए मनान चाहिए। आप सभी को दीवापली की हार्दिक शुभकामनायें!

दिवाली त्योहार का आनंद लेने के लिए कुछ दिन की छुट्टी दी जाती हैं लेकिन कई स्कूलों में दिवाली के समय एक छोटासा होमवर्क भी देते हैं। और यह होमवर्क बच्चे ख़ुशी ख़ुशी करते भी हैं। वो होमवर्क हैं दिवाली पर निबंध लिखना। आज कल के बच्चों को दीवाली के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, इसलिए बच्चों को समझने के लिए और दिवाली पर निबंध – Essay on Diwali लिखने के लिए इस निबंध के ज़रिये हम आपकी थोड़ी मदत कर देते हैं।


दिवाली पर निबंध – Essay on Diwali in Hindi

भारत में साल भर बहुत से त्योहार मनाये जाते हैं, जहां सभी धर्मों के लोग अपनी संस्कृति और परंपरा के अनुसार अपने विभिन्न त्योहारों का जश्न मनाते हैं। “दिवाली” हिन्दू धर्म के लोगों का सबसे मशहूर, महत्वपूर्ण, पारंपरिक और सांस्कृतिक त्योहारों में से एक है, जो हर साल रिश्तेदारों, परिवार, मित्रों और पड़ोसियों के साथ मिलकर बहुत उत्साह से मनाते हैं। यह रोशनी का त्योहार या दीपावली के रूप में भी जाना जाता है।

यह त्योहार हिन्दू कैलेंडर के अनुसार ‘कार्तिक’ के महीने में मतलब अक्तूबर या नवम्बर के महीने में आता है।

दिवाली में हर घर में दीपक से सजाये जाते है। दीवाली के दिन हर कोई खुश होता है और एक -दूसरे को बधाई देता है।

दिवाली त्यौहार धनत्रयोदशी यानि धन तेर के साथ शुरू होता है, और नरक चतुर्दशी,लक्ष्मी पूजा (दिवाली), गोवर्धन पूजा और भाईदूज के साथ खतम होता हैं।

भारत में हर त्यौहार और उत्सव किसी कारण या एक किंवदंती के साथ जुड़ा हुआ है वैसे ही इस त्यौहार के पीछे भी एक कहानी हैं दीवाली का त्यौहार भगवान् श्रीराम अपने 14 वर्ष के वनवास को पूरा करने के बाद, अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अपने राज्य अयोध्या को वापसी की याद दिलाता है। अयोध्या के लोगों ने मिट्टी के दियें लगाकर राज्य को रोशन करके अपने राजा का स्वागत किया।

दीवाली उत्सव की तैयारी – Diwali celebration

दीवाली के दिन हर कोई खुश होता है और एक-दूसरे को बधाई देता है। बच्चे खिलौने और पटाखे खरीदते हैं। दीवाली के कुछ दिन पहले दिवाली के लिए लोग अपने घरों, दुकानों को सफाई और चित्रित करते हैं। वे इस अवसर पर नए कपड़े, उपहार, बर्तन, मिठाई आदि खरीदते हैं। इसे नई दुकानों, घर, व्यवसाय और साझेदारी आदि के उद्घाटन के शुभ अवसर माना जाता है।

धन तेरस – Dhanteras

धन तेरस को घर के लिए कोई वस्तु, और सोने, चांदी आदि खरीदने के लिए एक शुभ दिन माना जाता है। लोग इस दिन को नए व्यापार शुरू करने के लिए शुभ मानते हैं।

नरक चतुर्दशी – Narak Chaturdashi

इस दिन था जिस पर राक्षस नरकासुर भगवान कृष्ण द्वारा मारा गया था जो कि अंधेरे पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है।

लक्ष्मी पूजा – Lakshmi Pooja

लक्ष्मी पूजा यह दिन दिवाली का महत्वपूर्ण दिन माना जाता हैं इस दिन रंगोली और दियें की रोशनी के साथ घर और मंदिर को सजाकर लोग अपने घरों और दुकानों और व्यावसायिक स्थानों पर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा शाम को करते हैं।

लक्ष्मी धन की देवी है और गणेश को शुभ शुरुआत के देवता के रूप में माना जाता है। लोग सड़कों, बाजारों, घरों और परिवेश में समृद्धि और कल्याण की इच्छा के लिए तेल से भरे प्रकाश की मिट्टी के साथ दिवाली का स्वागत करते हैं। इस अवसर पर पटाखे मुख्य आकर्षण हैं। पड़ोसियों, मित्रों और रिश्तेदारों को घरों और मिठाई वितरण में पकाया स्वादिष्ट भोजन दिवाली उत्सव का हिस्सा हैं। दिवाली की रात को लोग अपने घरों के दरवाजे खुल गए क्योंकि वे देवी लक्ष्मी की यात्रा की उम्मीद करते हैं।

गोवर्धन पूजा और बलिप्रतिपदा – Govardhan Puja / Balipratipada

इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र को पराजित किया और इंद्र द्वारा आयोजित भारी बारिश से अपने ग्रामीणों और मवेशियों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाया।

उत्तर भारत में गोबर, गन्ने, किताबें, हथियार और उपकरण आदि इस अवसर पर शाम को पूजा करते थे।

महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक में लोग इस दिन बलिप्रतिपदा के रूप में मनाते हैं जो दानव राजा बाली के ऊपर विष्णु के बौना वामन अवतार की विजय का स्मरण करता है।

भाईदूज – Bhai Dooj

भाईदूज त्योहार भाई और बहन के स्नेह का प्रतीक है। बहन अपने भाई को तिलक और नारियल और मिठाई की पेशकश करती है जहां भाई अपनी बहन को उपहार देता है।

दीवाली के अवसर पर हर समुदाय और उम्र के लोगों में उत्साह से भरा होता है। विभिन्न संस्कृतियों द्वारा उसी त्यौहार के उत्सव के विभिन्न तरीकों से और अधिक सुंदर बना दिया जाता है।

स्कूल, कॉलेज में कुछ दिनों की छुट्टिया दी जाती हैं ताकि बच्चे त्योहार का आनंद उठा सकें। बैंक नई योजनाएं और ब्याज दरों की पेशकश करते हैं हर साल इस अवसर पर भारी बजट नई फिल्में जारी की जाती हैं।

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