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Short Essay on 'Republic Day: 26 January' of India in Hindi | 'Gantantra Diwas' par Nibandh (125 Words)

Short Essay on 'Republic Day: 26 January' of India in Hindi | 'Gantantra Diwas' par Nibandh (125 Words)
गणतंत्र दिवस

भारत में 'गणतंत्र दिवस' 26 जनवरी को मनाया जाता है। 1950 में 26 जनवरी को भारत में नया संविधान, भारत का संविधान लागू हुआ था।

गणतंत्र दिवस भारत में मनाये जाने वाली तीन राष्ट्रीय छुट्टियों में से एक है। इस दिन नई दिल्ली में विशेष परेड का आयोजन किया जाता है। राष्ट्रपति परेड की सलामी लेते हैं। राजपथ पर परेड का भव्य आयोजन होता है। भारतीय सेना की तीनों विंग इसमें हिस्सा लेती हैं।

देश के सभी राज्यों क़ी राजधानियों में झंडा रोहण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। सभी सरकारी, अर्द्ध-सरकारी, निगम एवं प्रशासनिक कार्यालयों में झंडारोहण का कार्यक्रम होता है। स्कूल एवं कालेजों में विभिन्न कार्यक्रम, खेल-कूद एवं प्रतियोगिताओं का आयोजन भी होता है तथा विजेताओं को सम्मानित किया जाता है।
 

Republic Day 2018: देश को आजादी 15 अगस्त 1947 को मिली, लेकिन आजाद भारत के लिए एक पुख्ता संविधान की जरूरत थी ताकि देशवासियों के मूल अधिकार, शासन प्रणाली और न्याय व्यवस्था सुचारू रूप से चल सकें और लोकतंत्र को मजबूती मिले। 26 जनवरी 1950 को जब संविधान लागू हुआ तो देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने रेडियो के जरिये दुनिया को संबोधित किया था। पंडित नेहरू के भाषण में देश ही नहीं, दुनिया को, खासकर पश्चिमी देशों को एक संदेश था। पहले गणतंत्र दिवस पंडित नेहरू का वह भाषण बहुत ही दुर्लभ है। आजादी की रात वाला उनका भाषण तो लगभग सभी ने सुना है, लेकिन गणतंत्र दिवस पर उनका भाषण कम ही लोगों ने सुना है।

रेडियो पर अंग्रेजी में दिए उनके इस भाषण में खास तौर पर दुनिया के सभी देशों से चैन और अमन की अपील की गई थी। उन्होंने अपने भाषण मे कहा था युद्ध और शांति की मुहिम एक साथ चलने से पनपे असंतुलन को सुधारना होगा, पूरी दुनिया शांति चाहती है, जिसे देशों को समझना होगा। उन्होंने कहा था कि पश्चिमी देशों के उनके दौरे से यह साफ है कि दुनिया को अब शांति चाहिए।गणतंत्र दिवस पर भाषणों में आज भी हम भारत की शांतिप्रियता और विकास की पैरोकारी की ही बात करते हैं। शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा पाकिस्‍तान बना हुआ है। चीन भी भारत को परेशान करता रहा है। इसलिए आज भी शांति के महत्‍व को समझना उतना ही जरूरी है, जितना पहले गणतंत्र दिवस के वक्‍त पर था।

कुछ ऐसा था पहले गणतंत्र दिवस का नजारा: पहला गणतंत्र दिवस दिल्ली के इरविन एम्पीथियेटर में मनाया गया था। इस जगह को अब मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम कहते हैं। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकानो गणतंत्र दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि बुलाए गए थे। पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने जैसे ही तिरंगा फहराया था, तिरंग के फहराते ही दनादन 21 तोपों सलामी से राजधानी गूंज उठी थी।
बता दें कि इस बार (2018) भारत का 69वां गणतंत्र दिवस है। इस बार यह मौका इसलिए भी खास है क्यों कि पहली बार 10 देशों के नेता बतौर मुख्य अतिथि इस समारोह मे बुलाए गए। इनमें ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाइलैंड और वियतनाम के राष्ट्राध्यक्ष शामिल है।

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पंडित नेहरू का पूरा भाषण इस वीडियो में सुनिए।

गणतंत्र दिवस के 10 मुख्य अतिथि: थाईलैंड के प्रधानमंत्री जनरल प्रायुत चान ओ चा, म्यांमार की नेता आंग सान सू की, ब्रुनेई के सुल्तान हसनअल बोल्किया, कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन सेन, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो, सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सियन लूंग, मलेशिया के प्रधानमंत्री नजीब रजाक, वियतनाम के प्रधानमंत्री न्गुयेन शुयान फुक, लाओस के प्रधानमंत्री थॉन्गलौन सिसोलिथ और फिलीपींस के राष्ट्रपति ड्रिगो दुतेर्ते बतौर मुख्य अतिथि समारोह में शामिल हो रहे हैं।

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